Breaking News, Uttarakhand Glacier Burst की वजह से हाईवे पर काम कर रहे मजदूर दब गए हैं। खबर लिखने तक 33 मजदूर निकाले जा चुके हैं और 22 मजदूरों का पता नहीं चल रहा। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और माणा गांव के पास हम हिमस्खलन की वजह से 22 मजदूर अभी भी दबे हुए हैं। चमोली के जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने मीडिया को जानकारी दी कि 57 मजदूरों में 35 मजदूरों रेस्क्यू कर लिए गए हैं लेकिन 22 का अभी पता नहीं चल रहा। आईए जानते हैं इस हादसे की पूरी डिटेल्स:
Breaking News Uttarakhand Chamoli Avalanche, कब हुआ हादसा
Media Breaking News के अनुसार उत्तराखंड चमोली में हिमस्खलन सुबह करीब 7:15 में हुआ जिसमें बहुत से श्रमिक बर्फ में दब गए। ये मजदूर उत्तराखंड में सेना के आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए नियमित रूप से बर्फ हटाने का काम करते थे लेकिन अचानक ही ही हिमस्खलन होने की वजह से मजदूर बर्फ में दब गए। जैसे ही घटना की सूचना मिली सेना सहित पुलिस, सीमा सड़क संगठन, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कर दिया।
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चमोली के डीएम संदीप तिवारी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार शुरुआत में ही 10 मजदूरों को सेना और आईटीबीपी की टीम ने निकाल लिया था, जिन्हें आईटीबीपी के अस्पताल में एडमिट कराया गया। इनमें से चार मजदूरों की हालत नाजुक है। सेना की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार जैसे ही हिमस्खलन हुआ बचाव कार्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध “आईबैक्स ब्रिग्रेड” को सक्रिय कर दिया गया। बचाव की टीम में डॉक्टर और एंबुलेंस भी शामिल थे।
Breaking News, फंसे मजदूरों में बिहार और यूपी के मजदूर भी हैं शामिल
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से Glacier Burst के बाद फंसे मजदूरों की एक लिस्ट जारी की गई है जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पंजाब समेत कई राज्यों के मजदूर फंसे हैं। आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार रेस्क्यू का काम काफी चैलेंजिंग है क्योंकि जहां हिमस्खलन हुआ है वहां पर 7 फीट तक नीचे की ओर बर्फ जमी है। Rescue में इस समय 65 से भी ज्यादा कर्मचारी लगे हुए हैं।
रास्ते में फंसी रेस्क्यू टीम

आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी की तरफ से जानकारी दी गई कि माणा में ITBP Team और सेना हाथी की तुरंत बाद ही बचाव कार्य में जुट गई है लेकिन खराब मौसम की वजह से टीम रास्ते में फंस चुकी है। जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां ठण्ड में डेंजर जोन होता है, यही वजह है कि पहले के समय में ठण्ड में यहां के कैंप बंद कर दिए जाते थे और लोगों को हटाकर बद्रीनाथ में शिफ्ट किया जाता था। लेकिन इस बार बर्फ नहीं गिरी जिस वजह से कैंप बंद नहीं किया गया था और मजदूर हादसे की चपेट में आ गये।
चेतावनी हुई जारी
चंडीगढ़ के रक्षा भू सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान की तरफ से पहले ही उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों के लिए 2400 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के स्थान पर 24 घंटे की अवधि के लिए हिमस्खलन की चेतावनी जारी कर दी गई थी। इतना ही नहीं राज्य आपदा प्रचलन केंद्र ने संबंधित जिला अधिकारियों को भी Alert भेज दिया था।