Mahila Diwas 2025: हर वर्ष की तरह आज भी पूरी दुनिया में इंटरनेशनल वूमेंस डे (International Women’s Day) मनाया जा रहा है। आज का दिन महिलाओं को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है लेकिन क्या वास्तव में हमारे देश में महिलाओं को सम्मान मिल रहा है? हर दिन न्यूज़ पेपर में हमें महिलाओं के बलात्कार, एसिड अटैक, महिला उत्पीड़न और छेड़छाड़ संबंधित खबरें पढ़ने को मिलती हैं लेकिन महिलाओं के अदम्य साहस और हिम्मत की वजह से वो विपरीत परिस्थितियों में भी एक सितारे की तरह चमक जाती हैं। आज हम इंटरनेशनल वूमेंस डे(Mahila Diwas 2025) के अवसर पर आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी महिलाओं के बारे में, जिन्होंने उस समय हिम्मत नहीं हारी जब जिंदगी जीने के रास्ते भी बंद कर देती है:
Mahila Diwas 2025 पर जाने Acid Attack Survivor Laxmi Agarwal के बारे में
यदि आपने दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक(Chhapak) अच्छी हो तो आप लक्ष्मी अग्रवाल(Laxmi Agarwal) को जानते होंग। इस फिल्म में दिखाई गई कहानी पूरी तरह से सच्ची घटना पर आधारित है। भले ही दीपिका का जला हुआ चेहरा मेकअप से तैयार हुआ हो लेकिन जिसकी कहानी को इस फिल्म में दिखाया गया, उनका चेहरा वास्तव में जला हुआ था और इसी चेहरे के साथ वो समाज का सामना कर रही हैं। जी हां! हम बात कर रहे हैं लक्ष्मी अग्रवाल के बारे में जो एसिड अटैक सरवाइवर है।
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वर्ष 2006 में पढ़ाई में होनहार लक्ष्मी की जिंदगी ने उस समय यू टर्न ले लिया जब उनके ऊपर एक सरफिरे लड़के ने एसिड अटैक किया। इसके बाद उनके जीने के सारे रास्ते खत्म से हो गए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। एक वर्ष के अंदर पीआईएल दाखिल करके सुप्रीम कोर्ट में तेजाब को बैन करने की मांग उठाई गई। लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी में एसिड अटैक के बाद काफी उतार चढ़ाव आए, लेकिन आज वो महिलाओं के लिए काम करती है। समाज में एसिड हमले के बाद बिना किसी डर और शर्म के नजरे उठाकर कैसे जीना है इसके लिए हमें लक्ष्मी अग्रवाल से काफी प्रोत्साहन मिलता है। लक्ष्मी अग्रवाल हमारे समाज में हर उस लड़की के लिए एक मिसाल है जो आगे बढ़ने का सपना देख रही है। उन्होंने सिद्ध कर दिया की कुछ सरफिरो की वजह से महिलाओं को सपने देखना बंद नहीं करना चाहिए।
Mahila Diwas 2025 पर सुने Mary Kom की सफलता के किस्से
मैरी कॉम हर उस लड़की के लिए एक प्रेरणा की मिसाल है जो छोटे से शहर में रहकर बड़े-बड़े सपने देख रही है। मणिपुर के गरीब किसान परिवार में मैरी कोम का जन्म हुआ था। उन्होंने बॉक्सिंग सीखने के लिए 15 वर्ष की उम्र में अपना घर तक छोड़ दिया। वर्ष 2000 में मैरी कॉम जब राज्य से चैंपियन बनी तो उनकी तस्वीर को अखबार में देखकर उनके पिता को उनके सपने के बारे में पता चला। 2001 में पहली बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर उन्होंने मेडल जीता और शुरू कर दिया अपने सफल करियर का सफर। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2002,2005,2006, 2008,2010 और 2018 में वर्ल्ड चैंपियन बनकर हिस्ट्री क्रिएट कर दी। 2019 में उन्हें ब्रांच मेडल भी मिला जो उनके लिए काफी खास था, क्योंकि भारत के लिए ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करने वाली वह पहली भारतीय महिला मुक्केबाज थी। मैरी कॉम ने भारत को मुक्केबाजी में दूसरा ओलंपिक मेडल दिलाया था।
Mary Kom Women’s Empowerment की मिसाल
Mahila Diwas 2025 के इस मौके पर हम आपको बताना चाहते हैं कि Mary Kom केवल भारत की मुक्केबाज ही नहीं बल्कि हर उस लड़की के लिए इंस्पिरेशन है जो बड़े सपने देखती है। केवल सपने ही देखना नहीं बल्कि संघर्ष और मेहनत करने से ही सफलता हासिल होती है। यदि आपके इरादे मजबूत है तो आपके सामने दुनिया की कोई भी समस्या छोटी ही होगी दृढ़ निश्चय करें और आगे बढ़े।
Mahila Diwas 2025, Sarojini Naidu ने किया अद्भुत काम
सरोजिनी नायडू हमारे देश में उन जांबाज महिलाओं में शामिल है जिनके नाम का परचम पूरी दुनिया भर में लहराया। उन्हें द नाइटेंगल ऑफ़ इंडिया के नाम से जाना जाता था। उनकी कविताएं काफी प्रचलित है। इसके अलावा उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भी प्रमुख भूमिका निभाई थी। सरोजिनी नायडू ने महिलाओं के अधिकारों के लिए कानून मे बहुत से बदलाव किये। इसके साथ-साथ उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में भी प्रमुख भूमिका निभाई। आज उनका नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज है। एक महिला होने के बावजूद महिलाओं को समर्थन करना Women’s Empowerment की अद्भुत मिसाल है।
Mahila Diwas 2025 के मौके पर हमारे देश की हर महिलाओं को सलाम जो देश को बढ़ाने के लिए और महिलाओं की देश में स्थिति को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास रस है। Happy Women’s Day!