Jyoti Yarraji 100m Hurdles
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Jyothi Yarraji 100m Hurdles: जीत का मजा उस समय दो गुना हो जाता है जब हमारा हौसला बढ़ाने के लिए हमारी परिजन या हमारे फैंस आसपास मौजूद होते हैं लेकिन हम आपको एक ऐसे एथलीट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने भारी बारिश के बीच भी भारत को गोल्ड मेडल जीता दिया लेकिन स्टेडियम में उनका हौसला बढ़ाने को कोई नहीं और आखिरकार आ गए उनकी आंखों में आंसू:

Jyothi yarraji 100m hurdles

भारत में कुछ ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं जिन्हें किसी भी Boost up की जरूरत नहीं। आज हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे तेज महिला हर्डलर Jyothi Yarraji के बारे में जो कुछ ही सालों में ट्रैक एंड फील्ड में अपनी खास पहचान बना चुकी है। 100 मीटर हर्डलर में राष्ट्रीय रिकार्ड धारक Jyoti Yarraji ने एशियाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीते हैं, जो दिखाता है कि वो कितनी ही कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प वाली महिला है।

न तालियों की गड़गड़ाहट ना सफलता की गूंज 

Jyothi Yarraji ने गोल्ड मेडल तो जीत लिया लेकिन उस पल स्टेडियम में उनका हौसला बढ़ाने के लिए कोई नहीं था। न हीं शोर था, न हीं भीड़ थी। खाली स्टेडियम और उसके बीच थी भारत की सबसे तेज महिला हर्डलर ज्योति (Jyothi Yarraji 100m Hurdles)। कहते हैं प्रतिभा किसी के पहचान की मोहताज नहीं होती। स्टेडियम  में ज्योति पूरी एकाग्रता और मेहनत से दौड़ी चली जा रही थी, और अंत में उन्हें हासिल हुई सफलता। Jyothi Yarraji 100m Hurdles में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर दिखा दिया की सच्ची जीत को भीड़ की जरूरत नहीं होती कई बार इतिहास खामोशी से लिखे जाते हैं। 

स्टेडियम में इमोशनल हो गई ज्योति 

जैसे ही Jyothi Yarraji को पहले पायदान पर खड़ा किया गया तो वो इमोशनल हो गई और उनके आंखों से आंसू बह निकले। ना ही कोई चका चौंध और ना ही कोई भीड़ लेकिन फिर भी वो कर दिखाया जो लोग सपने में भी नहीं सोच सकते। देखिए Jyothi yarraji video

Asian Athletic Championship 2023|Jyothi Yarraji|#AsianAthleticsChampionship#AAC2023Bangkok

Jyoti Yarraji 100m Hurdles मुश्किलों भरा रहा बचपन 

Jyoti Yarraji 100m Hurdles भले ही आज किसी भी पहचान की मोहताज न हो लेकिन एक समय था जब ये प्रतिभा अंधेरी गलियों में पल रही थी। पिता प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड और मां शहर के अस्पताल में पार्ट टाइम साफ सफाई करने वाली, भला ऐसे में कोई ऊंचे सपने कैसे देख सकता है। ज्योति याराजी ने सपने देखे और देखे नहीं अपनी कड़ी मेहनत से उन्हें सरकार भी किया। 

फिजिकल एजुकेशन टीचर ने पहचानी प्रतिभा 

Jyoti Yarraji ने सपने तो देखे लेकिन उन्हें एक मौका चाहिए था, जिससे वो अपनी प्रतिभा को दिखा सके। उनकी लंबाई अच्छी थी और वो बहुत ही फुर्तीली थी और इसे पहचाना उनके फिजिकल एजुकेशन टीचर ने, उन्हें लगा कि ये लड़की हर्डलिंग के लिए बिल्कुल सही है और फिर ऐसे शुरू हुआ Jyoti Yarraji का सफलता का सफर।

2015 में बदल गया जीवन 

आंध्र प्रदेश में ज्योति ने वर्ष 2015 में इंटर डिस्ट्रिक्ट मीट में गोल्ड मेडल जीता, फिर क्या था भारत की इस धुरंधर एथलीट को लग गया जीत का चस्का और फिर उन्होंने हैदराबाद में शुरू की अपनी SAI सेंटर की ट्रेनिंग। जहां वो अवॉर्डी N Ramesh  से मिली। राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें शुरुआत में काफी मुश्किलें झेलनी पड़ी लेकिन उनकी कंसिस्टेंसी की वजह से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

जेम्स हीलियर ने किया मार्गदर्शन 

वर्ष 2019 में उनके करियर को मिला एक नया मोड़ क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश कोच जेम्स हिलियर के मार्गदर्शन में तकनीक और रेस के दौरान मानसिक संतुलन कैसे बनाए रखें, इसकी लर्निंग की। बहुत सी मुश्किलें आई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2022 में साइप्रस इंटरनेशनल मीट लीमासोल में उन्होंने पहली आधिकारिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। 

इस रिकॉर्ड में उन्होंने 13.23 सेकंड में रेस पूरी की और दो दशक पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ डाला। उसके बाद एक-एक करके सफलता की सीढ़ियां पार की और आज वो ले आई एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप का खिताब और बनाया एक नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड।

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